आपकी मुस्कान हमारी एकलौती
आपकी मुस्कान हमारी एकलौती कमजोरी है,
कह न पाना तुम्हे हमारी मजबूरी है,
आप क्यों नहीं समझती इस जज़्बात-इ-दिल को,
क्या खामोशियों को ज़ुबान देना ज़रूरी है…
भरने को बाहो में तुझे दिल चाहता है,
तुझे बिखर के चाहने को दिल चाहता है,
क्यों नहीं दूर होते ये फैसले है जो दरमियाँ हमारे,
की अब तुझे जी भर के देखने को जी चाहता है.