आसमान से तोड़ कर


आसमान से तोड़ कर ‘तारा’ दिया है|
आलम ए तन्हाई में एक शरारा दिया है|
मेरी ‘किस्मत’ भी ‘नाज़’ करती है मुझे पे|
खुदा ने ‘दोस्त’ ही इतना प्यारा दिया है…!!


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