एक दूजे के हाल


एक दूजे के हाल से हम अंजान तो नहीं…
फिर भी हम एक दूजे को तडपाते बहुत हैं…

देखने वालों को लगतें है हम बिल्कुल बेफिकरे….
पर हकीकत में हम एक दूजे को याद आते बहुत है….

जब जज्बात ए महोब्बत का वक्त होता है तो हम खामोश रहते है…
बाद में वो पल याद कर के हम पछताते बहुत है….

पहले कौन बात करेगा रोज इस कश्मकश में दिन गुजर जाता है…
फिर एक दूजे को याद कर अपनी रातों को जलाते बहुत है….

जानते है जिन्दगी का हर सपना अधूरा है हमारा एक दूजे बिन…
फिर भी बिछडनें की बात हम दोहराते बहुत है….

हर बन्दिश हर फासले से बढकर बस इतना ही कहुगां दोस्तों….
दिल ओ जान से टूट कर हम एक दूजे को चाहते बहुत हैं….


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