तेरे मेरे कुछ सपने
तेरे मेरे कुछ सपने हैं जो मैने सजाये हैं…
कुछ मुकाम खूबसूरत मैने बनाये हैं…
मेरो कन्धे पर सर रख कर तेरे वो बारिश की बूंदों से खेलना…
तुझ से जब लिपटूं अचानक से तो तुम मुझे प्यार से पिछे धकेलना…
मेरे सीने पे सर रख कर तेरा बेखौफ सो जाना…
हर पल मोहब्बत में तेरा मेरा हो जाना…
बहुत से ख्वाब हैं ऐसे जो मैने सजाये हैं…
बहुत से ऐसे ही प्यारे मुकाम बनाये हैं…
उस बूढ़ी सी आंखों में प्यार तब भी हो आज जितना…
मुझे देखते ही तेरा तड़प कर मुझ से लिपटना…
ये सब सोच कर दिल को बड़ा सुकून आता है…
हर घड़ी ये दिल ऐसे ही सपने सजाता है…
धीरज झा…