पड़ी रहती है मायूस


पड़ी रहती है मायूस सी हो कर दिल के किसी कोने मे…
तुम्हारा नाम सुनते ही गुनगुन मोहब्बत जाग जाती है…

तुम्हे फिर ढूंढती हैं ये आंखें ख्वाबों ख्यालों में…
सुखी पड़ी दिल की बगीया को से उम्मीद फिर से सजाती है…

तुम्हे कुछ याद हो ना हो मगर मैं अब तक नही भूला…
ले कर नाम तुम्हारा चुपके से ये यादें तुम्हारी भाग जाती हैं…

बड़े आराम से दबे पांव आया करो दिल के कोने में…
नही तो सो रही मोहब्बत शोर सुन कर जाग जाती है…


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