मैने तुम्हे अपने आशुओं
मैने तुम्हे अपने आशुओं की सुनाई…
पर मेरी हर मुस्कुराहट में तुम ही हो…
मैंने तुम्हे अपने रातों की वजह नहीं बताई…
पर मेरे सपनों की खूबसूरती तुम ही हो…
मैंने तुम्हे अपने अहसास की बेताबी नहीं दिखाई…
पर मेरे हर जज्बात की तिश्नगी तुम ही हो…
मैंने तुम्हे अपनी बीते कल से रूबरू नहीं करवाया…
पर मेरे आज और आने वाले कल में तुम ही हो…
मैंने तुम्हे अपने लफ्जों में बसे शक्श से नहीं मिलवाया…
पर मेरे हर लफ्ज की गहराई तुम ही हो….
मैंने तुम्हे अपनी यादों से दूर ही रहना सिखाया…
पर मेरी हर याद में समायी तुम ही हो…
मैंने तुम्हे अपनी खामोशी का किस्सा नही सुनाया….
पर मेरी हर पुकार की सदा तुम ही हो…
मैंने तुम्हे अपना हाल ए दिल कभी नहीं जताया…
पर मेरे जीने की वजह तुम ही हो……