स्मशान के बाहर लिखा


स्मशान के बाहर लिखा था
ज़िंदगी का कटु सत्य__

“मंजिल तो तेरी यही थी,
बस जिन्दगी गुजर गई आते आते।
क्या मिला तुझे इस दुनिया को सता के,
अपनों ने ही जला दिया तुझे जाते जाते!”
👌👌👌👌👌👌👌👌


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