“तुझे हर एक सवाल


“तुझे हर एक सवाल के लिए अब तैयार रहना है…
कोई भी ये पूछ सकता है कि मै तेरा क्या लगता हूं…”

तुझ से बिछड कर भी जुदा हो नही सकता…
इससे बढ कर अब, मै अब तेरा हो नहीं सकता…

कहीं पर बैठकर हसना कही पर रो लेना…
इंसान यादों से कभी रिहा हो नहीं सकता…

तुम पूछते हो मुझे से कि, सिकायत क्यूं नहीं की…
महोब्बत का कर्ज इस तरह अदा हो नहीं सकता…

राह ए इश्क में अंधेरा भी होता है हुजूर…
रोशन इनता भी कोई दिया हो नहीं सकता…

वो रखना चहते हैं कुछ तो तलुक आज भी…
वही कुरबत, फिर वही जज्बा हो नही सकता…

महोब्बत में बस सर्त की कोई गुंजाइस नहीं होती…
वरना तो चाहे तो जिन्दगी में क्या हो नहीं सकता…

फासले इतनें ना बढाओ के सरमिन्दगी हो जाना…
टाज के दौर में कोई रिश्ता फिर जिन्दा हो नहीं सकता…


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