“तुम मुझे रूह में
“तुम मुझे रूह में बसा लो तो अच्छा है
ये दिल ओ जान के रिश्ते अक्सर टूट जाते है”
चाहूं तुझे मैं, तेरी दीवानगी से प्यार करूं
तेरी आंखो से छू के तेरे लबों का सिंगार करूं
ना कुछ भी कहूं तुझ से ना कुछ मैं तेरी सुनू
इन लबों से छू के तेरे लबों का सिंगार करूं
जुल्फों के बादल में तेरे धडकन पे दस्तक दूं
दिवाना बना दे तुझे कुछ ऐसा अब याद करूं
मैं महकूं तेरी खुशबू में और महके मुझ से तू
धडकन क्या चीज है जान तुझे पर निसार करूं
मर भी जाउं अगर और जनम हो दूसरा मेरा
बस तुझ से ही महोब्बत मै, जाना हर बार करूं