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चहे मन्दिर हो या


चहे मन्दिर हो या मस्जिद…
मैं हर दर पे तेरी राह निहारूंगा…

लूंगा तेरा नाम अपने खुदा के आगे…
अपनी दुवाओं में भी बस तुझे ही पुकारूगा…

तुझे सोचा करूंगा हर पहर….
तेरे प्यार से अपना हर नक्श सवारूगा….

जो कमियां मेरी तन्हाइयों ने मुझे दी है….
तेरी पाक महोब्बत से उन सबको सुधारूगा….

हमारे एक साथ रहने का ख्वाब जरूर पूरा होगा…
और खुदा की मरजी से ही हर दिन तेरे साये में गुजारूगा….

रात को रात का


रात को रात का तोफा नहीं देते,
दिल को जजबात का तोफा नहीं देते,
देने को तो हम आप को चाँद भी दे दे,
मगर चाँद को चाँद का तोफा नहीं देते. …