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आसमान से तोड़ कर


आसमान से तोड़ कर ‘तारा’ दिया है|
आलम ए तन्हाई में एक शरारा दिया है|
मेरी ‘किस्मत’ भी ‘नाज़’ करती है मुझे पे|
खुदा ने ‘दोस्त’ ही इतना प्यारा दिया है…!!

मेरी जान जो आ


मेरी जान जो आ जाये मुश्किल जरा सी तो तुम उदास मत हुआ करो…
फूंलों से भी प्यारी मुश्कान है तुम्हारी तुम यूं ही मुश्कुराया करो…

नहीं हैं इतने कमजोर हमारे ख्वाब जो टूट जाये हकीकत की दुनिया में…
गर रूठ जाये खुदा तो हम उसे भी मना लेंगे तुम यकीन इस बात का खुदा पर किया करो…

हो भी गयी गर जंद दिन दुरियां तो उन्हें जुदाई मत समझना…
मैं धडकनों में बसता हूं तुम्हारे तुम ख्याल हर पल अपना किया करो…

होगी खूबसूरती से खुबसूरत प्यार से प्यारी दुनिया अपनी…
आसमां से भी उंची होती है इनकी रसमें तुम परवाह जामाने की मत किया करो…

ले जाउगां तुम्हें नगर चांद के जहां हूजूम जूगनू का होगा…
प्यार की कश्ती हैं वादे तूफान से भी लड. जाते है तुम यकीन मेरे वादे का किया करो…

मेरी जान तुम उदास मत हुआ करो……

ऐ दिल मत कर


ऐ दिल मत कर इतनी मोहब्बत किसी से;
इश्क़ में मिला दर्द तू सह नहीं पायेगा;
एक दिन टूट कर बिखर जायेगा अपनों के हाथों से;
किसने तोडा ये भी किसी से कह नहीं पायेगा। …